पैरेंटल कंट्रोल्स कैसे बच्चों को बिना किसी डर के कंटेंट देखने में मदद करते हैं
नई दिल्ली। सच कहें तो घर पर वीकेंड हमेशा धीमे और आरामदायक नहीं होते। ये एक जुगाड़ का खेल होते हैं—कपड़े धोने की मशीन चल रही है, चाय ठंडी हो रही है, हर दस मिनट में कोई नाश्ता मांग रहा है, और बैकग्राउंड में स्क्रीन पहले से ही चालू है। आजकल ज्यादातर माता-पिता के लिए सवाल ये नहीं रह गया कि “क्या मेरे बच्चे को कुछ देखना चाहिए?” बल्कि ये है कि “जब मैं 5 मिनट के लिए बाहर जाऊं, तो जो पहले से चल रहा है क्या उस पर भरोसा किया जा सकता है?” यहीं पर नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म परिवार की जिंदगी में चुपचाप अपनी जगह बनाते हैं। ये पैरेंटल कंट्रोल्स को सख्त नियमों की तरह नहीं, बल्कि एक भरोसे और सुकून की तरह महसूस कराते हैं।
सबसे पहले: बच्चों को अपना अलग स्पेस मिले
हर नेटफ्लिक्स अकाउंट में पहले से ही एक किड्स प्रोफाइल बना होता है। इसमें कोई जटिल सेटअप नहीं करना पड़ता। इस प्रोफाइल में सिर्फ उम्र के हिसाब से उपयुक्त शो और फिल्में दिखती हैं, और हर कंटेंट के आगे साफ-साफ मैच्योरिटी रेटिंग्स और सलाह लिखी होती है। इससे बच्चों को ऐसा लगता है कि ये उनका अपना स्पेस है, और माता-पिता को ये भरोसा मिलता है कि वे कुछ मिनट के लिए बाहर जा सकते हैं वह भी हर बार स्क्रीन चेक करने की जरूरत के बगैर।
क्योंकि हर परिवार के नियम अलग-अलग होते हैं
जो कंटेंट एक परिवार के लिए ठीक लगता है, जरूरी नहीं कि वो दूसरे के लिए भी हो। कुछ पेरेंट्स थोड़ा एडवेंचर वाला कंटेंट ठीक मानते हैं, तो कुछ और सॉफ्ट और हल्का-फुलका कंटेंट ही पसंद करते हैं।
प्रोफाइल को खास उम्र स्तर पर सेट किया जा सकता है, और अगर पेरेंट्स चाहें तो किसी खास फिल्म या सीरीज को पूरी तरह ब्लॉक भी कर सकते हैं—ताकि उसे बाद में देखा जा सके। ये इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल पैरेंटिंग कोई जन्मजात स्किल नहीं है। ये समय के साथ परिवार सीखते हैं। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं, कंट्रोल्स को आसानी से बदलने की सुविधा से सब कुछ ज्यादा मैनेजेबल लगता है और बाद में सुधारने वाला कम होता है।
एडल्ट प्रोफाइल को बच्चों की पहुंच से दूर रखना
शेयर स्क्रीन पर चीजें जल्दी ही मिक्स हो जाती हैं। एडल्ट प्रोफाइल को पिन से लॉक किया जा सकता है, ताकि छोटे बच्चे उनमें न जा सकें। इससे वे बड़े लोगों के लिए बने कंटेंट को नहीं देख पाते और न ही खुद से नया प्रोफाइल बना पाते हैं। ये एक आसान सुरक्षा कवच है जो बीच में रुकावट से बचाता है और अगर कोई गलत कंटेंट चल भी जाए तो उसे तुरंत रोकने की जरूरत नहीं पड़ती।
कंटेंट के साथ-साथ समय भी मैनेज करना
पैरेंटल कंट्रोल्स सिर्फ ये नहीं देखते कि बच्चा क्या देख रहा है, बल्कि यह परिवार को ये भी तय करने में मदद करते हैं कि कितनी देर तक स्क्रीन देखना ठीक है।
किड्स प्रोफाइल में ऑटो प्ले को बंद किया जा सकता है, ताकि एपिसोड या प्रीव्यू बिना रुके लगातार न चलते रहें। पेरेंट किसी भी प्रोफाइल की व्यूईंग हिस्ट्री देख सकते हैं। इससे बच्चों की देखने की आदतों का पता चलता है, और उन पर हर समय निगरानी करने की जरूरत नहीं पड़ती।
जिज्ञासा को सुरक्षित रूप से घूमने देना
बच्चे स्वाभाविक रूप से बहुत जिज्ञासु होते हैं। नेटफ्लिक्स के किड्स व्यूईंग एक्सपीरियंस को इसी तरह डिज़ाइन किया गया है कि बच्चे अपनी जिज्ञासा को खोज सकें, लेकिन वो सीमाओं के अंदर ही रहे—जो पेरेंट पहले से सेट कर चुके होते हैं। एनिमेटेड सीरीज से लेकर शिक्षाप्रद कहानियों तक, बच्चे अपनी रुचि के अनुसार स्वतंत्र रूप से देख सकते हैं, और देखने का माहौल हमेशा उचित और सुरक्षित रहता है। पेरेंट के लिए इसका मतलब अक्सर कम रुकावटें होती हैं और बार-बार शक करने या चेक करने की जरूरत नहीं पड़ती।
जब स्क्रीन टाइम बातचीत का समय बन जाता है
कई बच्चों और परिवार के लिए बने शो और टाइटल्स अपने आप ही दोस्ती, भावनाओं, और समस्याओं को सुलझाने जैसे विषयों पर बातचीत शुरू कर देते हैं। इसके साथ ही, पॉपुलर शो और कैरेक्टर्स से प्रेरित इंटरैक्टिव ऑफलाइन एक्टिविटीज़ भी उपलब्ध हैं—जैसे क्राफ्ट, गेम्स या छोटी-छोटी गतिविधियां। ये परिवारों को स्क्रीन से बाहर निकलकर भी जुड़ने के आसान तरीके देते हैं।
इससे स्क्रीन टाइम सिर्फ “मैनेज” करने की चीज नहीं रह जाता—कभी-कभी ये परिवार के साथ शेयर करने और साथ में कुछ नया सीखने का मजेदार मौका बन जाता है।
घर जैसी लगने वाली कहानियाँ
बच्चों और परिवार के लिए नेटफ्लिक्स के कैटलॉग में अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं की कहानियाँ हैं। भारतीय परिवारों के लिए इसका मतलब ये है कि बच्चे ऐसी कंटेंट देख सकते हैं जो उन्हें अपना-सा लगे और साथ ही दुनिया की दूसरी जगहों की कहानियाँ भी खोज सकते हैं। जब बच्चे स्क्रीन पर अपनी जिंदगी के कुछ हिस्से देखते हैं—जैसे घर का माहौल, रिश्ते, या रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातें—तो वे कहानी से ज्यादा गहराई से जुड़ जाते हैं।
ये टूल्स रोजमर्रा की जिंदगी में क्यों काम करते हैं
पैरेंटल कंट्रोल्स सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन इनकी असली ताकत रोज के इस्तेमाल में दिखती है। नेटफ्लिक्स ने इन फीचर्स को पेरेंट, शिक्षकों और बच्चों की सुरक्षा के विशेषज्ञों से लगातार बातचीत करके बनाया और बेहतर किया है। नेटफ्लिक्स द्वारा समर्थित डिजिटल पैरेंटिंग वर्कशॉप और स्कूल प्रोग्राम्स से अब तक 70,000 से ज्यादा पेरेंट्स और बच्चों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। ये प्रोग्राम परिवारों को सिखाते हैं कि कंट्रोल्स को कैसे ऐसे सेट करें जो उनकी असली दिनचर्या में फिट हों—न कि सिर्फ आदर्श तरीके से।
इसका मतलब एकदम सीधा है। ये टूल्स परफेक्ट घरों के लिए नहीं, बल्कि असली घरों के लिए बनाए गए हैं।
धारणाओं की जगह फीडबैक से बनाया गया
पैरेंटल कंट्रोल्स लगातार बदलते और बेहतर होते रहते हैं—परिवार इनका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं और वो क्या फीडबैक दे रहे हैं, यह इससे तय होता है। उद्देश्य कभी भी लगातार निगरानी करना नहीं है, बल्कि एक बार पसंदीदा सेटिंग्स चुन लेना और उन पर भरोसा करना है कि वे काम करेंगी।
आखिरकार, स्क्रीन टाइम को सुविधा और देखभाल के बीच समझौता करने की चीज नहीं बनना चाहिए। सही सेटिंग्स लगाने के बाद माता-पिता बेफिक्र होकर घर का कोई काम पूरा कर सकते हैं, थोड़ा आराम कर सकते हैं, या बस चुपचाप एक पल का मजा ले सकते हैं—ये जानते हुए कि बच्चा जो देख रहा है, वो उनके चुने हुए नियमों और सीमाओं के अंदर ही है।
जिन घरों में स्क्रीन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं, वहाँ असली फर्क यही भरोसा लाता है। ज्यादा सख्त कंट्रोल नहीं, बल्कि एक बार सेट किए गए अपनी पसंद के विकल्प जिन पर सभी भरोसा करते हैं।
बिना किसी बाधा के मी-टाइम का आनंद उठाएं
अलख सर ने आंगन वृद्धाश्रम का दौरा किया, बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए 21 लाख रुपये की सहायता प्रदान की
नोएडा । फिजिक्सवाला (पीडब्ल्यू) के संस्थापक एवं सीईओ अलख पांडेय, जिन्हें लोकप्रिय रूप से अलख सर के नाम से जाना जाता है, ने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण के लिए आंगन वृद्धाश्रम का दौरा किया और ₹21 लाख का सहयोग प्रदान किया। इस पहल का उद्देश्य संस्था की चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करना तथा निवासियों के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन-पर्यावरण सुनिश्चित करना है।
यह योगदान अलख सर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद किया गया है। हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यूपी दिवस समारोह के दौरान प्रतिष्ठित ‘यूपी गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा प्रदान किया गया, जिसमें ₹11 लाख की पुरस्कार राशि शामिल थी।
सामुदायिक सहभागिता की भावना के तहत, अलख सर ने यह उपलब्धि अपने कक्षा 10 के छात्रों के साथ साझा की और उनसे पूछा कि इस पुरस्कार राशि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। छात्रों ने सामाजिक कल्याण के आठ विभिन्न क्षेत्रों का सुझाव दिया। इस नई ‘वापस देने’ की यात्रा में आंगन वृद्धाश्रम पहला केंद्र बिंदु बना। उल्लेखनीय रूप से, अलख सर ने इस पहल को और आगे बढ़ाते हुए अपनी प्रतिबद्धता को ₹21 लाख तक बढ़ा दिया, ताकि संस्था की आवश्यकताओं को और अधिक प्रभावी ढंग से सहयोग मिल सके।
फिजिक्सवाला के संस्थापक एवं सीईओ अलख पांडेय ने कहा, “हर व्यक्ति को अपने जीवन के उत्तरार्ध में सम्मानपूर्वक जीवन जीने और आवश्यक देखभाल प्राप्त करने का अधिकार है। आंगन वृद्धाश्रम को सहयोग देकर हम यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं कि हमारे वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित और सहायक वातावरण मिल सके। हमारा उद्देश्य उस समाज को लौटाना है जो हमेशा हमारी रीढ़ रहा है। यह सामाजिक कल्याण के लिए हमारे निरंतर प्रयासों की दिशा में एक छोटा-सा कदम है।
यह पहल अलख सर की राष्ट्र-निर्माण की दीर्घकालिक सोच के अनुरूप है, जो शिक्षा से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर सामाजिक कल्याण तक विस्तृत है। फिजिक्सवाला ने इससे पहले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के समर्थन को संस्थागत रूप देते हुए सीआरपीएफ फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन (सीडब्ल्यूए), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और संदीक्षा (एसएसबी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन) के साथ औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं।
उत्तर प्रदेश में होगा फार्मा कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन, राज्य को भारत के अग्रणी फार्मा हब के रूप में स्थापित करने की पहल
- 3 फरवरी को फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 में उत्तर प्रदेश में फार्मा निवेश के अवसरों का प्रदर्शन होगा
- फार्मा कॉन्क्लेव 2026: उत्तर प्रदेश ने अपने विकास के सफर का हिस्सा बनने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स को आमंत्रित किया
- नीति से उत्पादन तक: लखनऊ, उत्तर प्रदेश में आयोजित कॉन्क्लेव फार्मा और मेडिकल डिवाईसेज़ की क्षमता को उजागर करेगी
लखनऊ । उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ.एस.डी.ए) और इन्वेस्ट यूपी 3 फरवरी, 2026 को लखनऊ के होटल ताज महल में ‘फार्मा कॉन्क्लेव 1.0: उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसर’ का आयोजन कर रहे हैं। इस कॉन्क्लेव का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को फार्मास्युटिल और मेडिकल डिवाईस के निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र के लिए मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर, विस्तृत उपभोक्ता बाजार और आशावादी एवं निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियाँ पेश कर रहा है।
इस कॉन्क्लेव का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, योगी आदित्य नाथ करेंगे। वो राज्य में एक पारदर्शी, सुरक्षित और निवेशकों के अनुकूल शासन व्यवस्था के बारे में बताएंगे। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री, जगत प्रकाश नड्डा; उप मुख्य मंत्री, ब्रजेश पाठक और अन्य मंत्री भी उपस्थित रहेंगे।
मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले साढ़े आठ सालों में हैल्थकेयर और फार्मास्युटिकल के क्षेत्र में भारी परिवर्तन हुआ है। हम भारत के सबसे बड़े हैल्थकेयर कंज़्यूमर मार्केट के रूप में स्वदेशी निर्माण को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसके लिए हम यमुना क्षेत्र में मेडिकल डिवाईस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग फार्मा पार्क जैसी विश्वस्तरीय पहल कर रहे हैं। हमारे ये प्रयास हमारे इस संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि हमें ‘मेक इन इंडिया’ को ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ तक ले जाना है, ताकि लाखों लोगों को किफायती, आसान और बेहतर हैल्थकेयर उपलब्ध हो सके।’’
फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 में हिस्सा लेने वाले मुख्य फार्मास्युटिकल कंपनियों के सीनियर लीडर्स में सन फार्मा के चेयरमैन दिलीप संघवी; ज़ाइडस फार्मा के चेयरमैन पंकज आर. पटेल; मैनकाइंड फार्मा के चेयरमैन रमेश जुनेजा; डॉ. रेड्डीज़ के चेयरमैन डॉ. सतीश रेड्डी; और टॉरेंट के वाइस चेयरमैन जीनल मेहता शामिल हैं। ये औद्योगिक लीडर उत्तर प्रदेश में इस सेक्टर के विकास और निवेश के अवसरों पर चर्चा करेंगे।
इस कॉन्क्लेव में देश के सबसे बड़े फार्मास्युटिकल एसोसिएशन, इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) की साझेदारी होगी। इसमें हिस्सा ले रही अन्य मुख्य औद्योगिक संस्थाओं में इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IDMA), बल्क ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BDMAI), ऑर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (OPPI), और फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स (FOPE) शामिल हैं, जिससे उत्तर प्रदेश को फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस में निवेश के मुख्य स्थान के रूप में स्थापित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है।
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाने के माननीय मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ के लक्ष्य के अनुरूप इस कॉन्क्लेव में फार्मास्युटिकल सेक्टर के मुख्य हितधारकों के साथ मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, इनोवेशन एवं संबंधित सेगमेंट्स के मुख्य घरेलू और ग्लोबल निवेशक भी हिस्सा लेंगे।
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े फार्मास्युटिकल बाजारों में से एक है। यह अब निवेशकों के अनुकूल नीतियों के साथ प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनने की राह पर बढ़ रहा है। यूपी फार्मास्युटिकल एंड मेडिकल डिवाईस इंडस्ट्री पॉलिसी 2023 के अनुसार निवेशकों को 15 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी पर 100 प्रतिशत छूट और बिजली शुल्क पर पूरी छूट जैसे प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही, यूपी एफडीआई/एफसीआई और फॉर्च्यून ग्लोबल 500 और फॉर्च्यून इंडिया 500 इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2023, यूपी इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट प्रमोशन पॉलिसी, 2022 तथा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स पॉलिसी, 2024 जैसी अनुकूल नीतियाँ मल्टीनेशनल एवं घरेलू कंपनियों को बिज़नेस का एक अनूकूल वातावरण प्रदान कर रही हैं।
इस कॉन्क्लेव में मुख्य इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के बारे में भी बताया जाएगा, जिनमें ललितपुर का आगामी बल्क ड्रग पार्क और ग्रेटर नोएडा का मेडिकल डिवाईस पार्क शामिल है। ये दोनों ही प्रोजेक्ट बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में शिक्षा और शोध का एक मजबूत परिवेश है। यहाँ पर 82 मेडिकल कॉलेज, 450 से अधिक फार्मास्युटिकल कॉलेज और कई अग्रणी संस्थान हैं, जिनमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, राय बरेली; किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साईंसेज़, आईआईटी कानपुर तथा आईआईटी बीएचयू शामिल हैं, जो उद्योग के लिए कुशल कार्यबल की उपलब्धता निरंतर बनाए रखेंगे।
राज्य में ईज़ ऑफ डूईंग बिज़नेसय पर जोर देते हुए भारत के सबसे बड़े सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम्स में से एक, निवेश मित्रा द्वारा प्रोजेक्ट्स को आवेदन से लेकर कमीशनिंग तक मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा समय पर अनुमोदन और रैगुलेटरी सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस राज्य में रेडी-टू-मूव औद्योगिक जमीन की उपलब्धता भी बहुत ज्यादा है, ताकि प्रोजेक्ट तत्काल शुरू किए जा सकें। यहाँ पर 25 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं और लगभग 56 प्रतिशत आबादी व्यस्क है। इसलिए उत्तर प्रदेश आबादी और बाजार के लिहाज से काफी बढ़त प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश में 13 एक्सप्रेस वे और 21 एयरपोर्ट का विशाल नेटवर्क है, जो लगातार बढ़ता जा रहा है। आगामी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से घरेलू और ग्लोबल बाजारों की आसान कनेक्टिविटी मिलेगी। इसलिए इस कॉन्क्लेव में हजारों करोड़ के एम.ओ.यू पर दस्तखत होने की उम्मीद है, जिससे उत्तर प्रदेश में निवेश में तेजी आएगी, रोजगार का निर्माण होगा और भारत में फार्मास्युटिकल निर्माण के क्षेत्र में मजबूती आएगी।
फिज़िक्सवाला ने पूरे भारत में कक्षा 10 के सीबीएसई छात्रों के लिए मुफ्त डाउट हल करने में मदद और मॉक प्रीबोर्ड्स की घोषणा की
नई दिल्ली । शिक्षा कंपनी फिज़िक्सवाला(पीडब्ल्यू) ने कक्षा 10 के सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 में भाग लेने वाले छात्रों की मदद के लिए एक योजना शुरू की है। इसमें देश के सभी छात्र मुफ्त डाउट हल करने में विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं। यह योजना सिर्फ पीडब्ल्यू के छात्रों के लिए नहीं, बल्कि देश के किसी भी कक्षा 10 के छात्र के लिए खुली है। इसका उद्देश्य परीक्षा के समय पढ़ाई का तनाव कम करना है।
पीडब्ल्यू देशभर में विज्ञान और गणित के लिए ऑफ़लाइन प्रीबोर्ड भी करवाएगा ताकि छात्रों की तैयारी मजबूत हो सके। ये परीक्षा पीडब्ल्यू के विध्यापीठ, पाठशाला और ट्यूशन सेंटर्स में होंगी। इससे छात्रों को असल बोर्ड परीक्षा जैसा अनुभव मिलेगा और वे समय सीमा में परीक्षा की तैयारी बेहतर कर सकेंगे।
फिज़िक्सवाला के विध्यापीठ-ऑफलाइन के सीईओ अंकित गुप्ता ने बताया कि, “शिक्षा पर कोई सीमा नहीं होनी चाहिए, खासकर जब छात्र बोर्ड परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण तैयारी कर रहे हों। कई छात्रों को तुरंत अच्छी मदद नहीं मिलती और एक छोटा डाउट भी उन्हें तनाव दे सकता है। इसलिए हमने अपने विध्यापीठ, पाठशाला और ट्यूशन सेंटर्स सभी छात्रों के लिए खोल दिए हैं, चाहे वे फिज़िक्सवाला के छात्र हों या नहीं। हम चाहते हैं कि छात्र खुद को सहारा मिला हुआ, आत्मविश्वासी और पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने के लिए तैयार महसूस करें।
भारत के सभी छात्र अपने पास के फिज़िक्सवाला विध्यापीठ, पाठशाला या ट्यूशन सेंटर जा सकते हैं और एक “डाउट बस्टर पास” ले सकते हैं, जो बोर्ड परीक्षा तक वैध रहेगा। इस पास के साथ छात्र जो भी उनके डाउट्स हों उनके हल के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। अनुभवी शिक्षक छात्रों के सवालों का जवाब देंगे, मुश्किल टॉपिक समझाएंगे और उत्तर लिखने की रणनीति भी बताएंगे। छात्र भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और जीव विज्ञान सभी विषयों की शंकाओं को हल कर सकते हैं और सीबीएसई कक्षा 10 के लिए रिविजन कार्ड भी प्राप्त कर सकते हैं, जो उनकी तैयारी में मदद करेगा।
छात्र अपने नज़दीकी सेंटर में 1 फरवरी 2026 को होने वाली विज्ञान परीक्षा और 8 फरवरी 2026 को होने वाली गणित परीक्षा के लिए पीडब्ल्यू ऐप के जरिए स्लॉट बुक कर सकते हैं।
यह योजना फिज़िक्सवाला के कुल 192 टेक्नोलॉजी वाले विध्यापीठ और पाठशाला सेंटर के जरिए शुरू की जा रही है, जो 30 सितंबर 2025 तक भारत के 132 शहरों में उपलब्ध रहेगी।
ज़ी’ ने लॉन्च किया ‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’, जिसने ब्रांड को दिलों से जोड़ा…
मार्केटर्स के लिए एक नया मीडिया फॉर्मेट
नई दिल्ली। भारत की अग्रणी कंटेंट और टेक्नोलॉजी कंपनी ‘ज़ी’ ने आज ‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’ लॉन्च करने की घोषणा की। यह एक ऐसा नया समाधान है, जिसके जरिए ब्रांड एक साथ कई स्क्रीन और अलग-अलग मंचों पर दर्शकों तक असरदार तरीके से पहुंच सकेंगे और अपनी अलग पहचान बना पाएंगे।
विज्ञापनदाताओं की चुनौती : पहुंच तो है, असर कैसे बने?
भारतीय विज्ञापन जगत में बड़ा बदलाव आया है। आज मीडिया तक पहुंच आसान हो गई है, जिससे छोटे और बड़े सभी ब्रांड आसानी से विज्ञापन की जगह खरीद सकते हैं। लेकिन इसी के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है — इतने सारे विज्ञापनों के बीच अलग कैसे नजर आएं?
जब लोगों का ध्यान जल्दी भटकता है और हर तरफ विज्ञापन दिखाई देते हैं, तब मार्केटिंग से जुड़े लोगों के सामने अहम सवाल है — सिर्फ दिखना काफी नहीं, याद कैसे रहें? ब्रांड से जुड़ाव कैसे बने और लोग उसे अपनाएं कैसे?
‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’ : जहां किरदारों की कहानी से बने ब्रांड का असर
‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’ इसी जरूरत का ‘ज़ी’ का जवाब है। यह किरदारों पर आधारित ऐसा मीडिया फॉर्मेट है, जो कहानी को स्वाभाविक तरीके से ब्रांड से जोड़ता है और लोगों के मन में जगह बनाने में मदद करता है।
पारंपरिक विज्ञापनों की तरह यह दर्शकों के देखने के अनुभव को बीच में नहीं रोकता, बल्कि ब्रांड को उन कहानियों का हिस्सा बनाता है, जिन्हें लोग पहले से पसंद करते हैं। ‘ज़ी’ के भरोसेमंद टीवी किरदार, जिन्हें देश के लाखों घर पहचानते हैं, ब्रांड को कहानी में ऐसे जोड़ते हैं कि वह बनावटी नहीं, बल्कि सहज लगे।
‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’ के चार दमदार आधार:
1. किरदारों से भरोसा : ‘ज़ी’ के लोकप्रिय किरदार यानी दिलफ्लुएंसर्स, ब्रांड संदेश को भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव के साथ लोगों तक पहुंचाते हैं, चाहे बात स्थानीय स्तर की हो या पूरे देश की।
2. टीवी से शुरू होकर हर जगह पहुंच : ये खास पल टीवी से शुरू होते हैं, जहां दर्शकों का भरोसा सबसे ज्यादा होता है, और फिर डिजिटल मंचों, सोशल मीडिया और कंटेंट बनाने वालों के जरिए आगे बढ़ते हैं।
3. अपने आप फैलने वाला असर : कहानी को इस तरह पेश किया जाता है कि लोग उसे खुद आगे साझा करें। इससे ब्रांड की पहचान स्वाभाविक तरीके से बढ़ती है, जबरदस्ती नहीं लगती।
4. हर मंच पर एक साथ मौजूदगी : टीवी, डिजिटल, सोशल मीडिया और कंटेंट क्रिएटर्स के नेटवर्क पर एक साथ पहुंच बनाकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।
केस स्टडी : “तुम हो लवली” अभियान
इस पहल की शुरुआत नेशनल गर्ल चाइल्ड डे पर “जब लाइफ को लेती हो लाइटली तो लगती हो और भी लवली” संदेश के साथ हुई। ‘ज़ी’ के हिंदी और मराठी शोज़ में किरदारों से जुड़े पलों के जरिए कहानी दिखाई गई, जो डिजिटल मंचों पर अपने आप फैल गई और क्रिएटर्स व कम्युनिटी की भागीदारी से लाखों बातचीत और प्रतिक्रियाएं सामने आईं। सान्या मल्होत्रा वाली एक ब्रांड फिल्म ने इस कहानी को और मजबूती दी और दिखाया कि टीवी से शुरू हुई बात कैसे तेजी से लोगों तक पहुंच सकती है और चर्चा का हिस्सा बन सकती है।
यह अभियान नए मीडिया फॉर्मेट ‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’ के असर को दिखाता है:
– इम्प्रेशंस: +25 मिलियन — टीवी, ज़ी5 और डिजिटल सहित कई मंचों पर जबरदस्त पहुंच
– कन्वर्सेशंस: +1 हजार — दर्शकों की सक्रिय भागीदारी का संकेत
– एंगेजमेंट: 2.5 मिलियन — संदेश से गहरा जुड़ाव
– क्रॉस-प्लेटफॉर्म रफ्तार : यह अभियान टीवी से डिजिटल, सोशल मंचों, व्हाट्सऐप और लोगों की बातचीत तक सिर्फ 24 घंटों में पहुंच गया
लक्ष्मी शेट्टी, हेड – एडवर्टाइज़मेंट रेवेन्यू, ब्रॉडकास्ट एंड डिजिटल, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने कहा, “जब दर्शक बीच में रोकने वाले विज्ञापनों से दूर जा रहे हैं, तब विज्ञापनदाताओं को ऐसे पल चाहिए जो सच्चे लगें और लोगों से जुड़ें। ‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’ मार्केटर्स के लिए एक नया मीडिया फॉर्मेट है, जो किरदारों पर आधारित कंटेंट के जरिए बड़े स्तर पर पहुंच देता है। यह अलग-अलग मंचों पर सहज रूप से चलता है और दर्शकों से निजी स्तर पर जुड़ता है। इसके जरिए हम विज्ञापनदाताओं को कहानी के माध्यम से ब्रांड से जुड़ाव बनाने का मौका दे रहे हैं, जिसे ‘ज़ी’ की राष्ट्रीय पहुंच का साथ मिलता है।
कार्तिक महादेव, चीफ मार्केटिंग ऑफिसर, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने कहा, “भारतीय विज्ञापन बाजार लगातार बढ़ा है, सिर्फ आकार में नहीं बल्कि पहुंच में भी। आज 100 मिलियन वाला ब्रांड और 10,000 मिलियन वाला ब्रांड दोनों आसानी से लोगों तक पहुंच बना सकते हैं। करीब एक लाख करोड़ के विज्ञापन बाजार का लगभग आधा हिस्सा वीडियो माध्यम से आता है, चाहे वह पारंपरिक टीवी हो या डिजिटल। ऐसे में सिर्फ पहुंच अब बढ़त नहीं देती, असली फर्क जुड़ाव से पड़ता है। यह जुड़ाव कहानी, पहचाने हुए किरदारों और ऐसे पलों से बनता है, जो अलग-अलग स्क्रीन पर दर्शकों के साथ रहते हैं। यहीं ‘ज़ी’ का ‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’ अलग साबित हो सकता है। हमारी पहुंच, हमारे दिलफ्लुएंसर्स और हमारी कहानियों से जुड़ी पहचान के साथ हम ब्रांड्स को उन पलों का हिस्सा बना रहे हैं, जिन्हें दर्शक पहले से पसंद करते हैं।
मार्केटर्स के लिए सार
– ऐसी दुनिया में जहां पहुंच खरीदना आसान है लेकिन याद रहना मुश्किल, ‘दिलफ्लुएंसर मोमेंट्स’ मार्केटर्स को एक मजबूत और बड़े स्तर का ऐसा माध्यम देता है, जो:
– ब्रांड्स को सांस्कृतिक रूप से जुड़े पलों का हिस्सा बनाता है
– स्वाभाविक तरीके से लोगों का जुड़ाव बढ़ाता है
– कई मंचों पर बड़े स्तर पर पहुंच सुनिश्चित करता है
– दर्शकों के ध्यान को लंबे समय याद तक रहने वाले ब्रांड कनेक्शन में बदलता है
डीआईटी विश्वविद्यालय के छात्र को मिला राष्ट्रीय गौरव
- गणतंत्र दिवस शिविर 2026 में उत्तराखंड का परचम लहराया
- प्रधानमंत्री रैली की कमान संभालकर रचा इतिहास, जिसे आरडीसी का सर्वाेच्च सम्मान माना जाता है
देहरादून। डीआईटी विश्वविद्यालय के सीनियर अंडर ऑफिसर उत्कर्ष शर्मा, जो बी.टेक (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) तृतीय वर्ष के छात्र हैं एवं राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) 29 उत्तराखंड बटालियन के कैडेट हैं, का चयन उत्तराखंड निदेशालय से गणतंत्र दिवस समारोह (आरडीसी)-2026 के लिए हुआ था। यह चयन एक अत्यंत कठिन एवं प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के पश्चात संपन्न होता है।
यह उपलब्धि उत्कर्ष शर्मा के अनुकरणीय अनुशासन, सशक्त नेतृत्व क्षमता एवं दृढ़ संकल्प को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। इस गौरवपूर्ण अवसर के माध्यम से उत्कर्ष ने न केवल डीआईटी विश्वविद्यालय का, बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखंड राज्य एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय कैडेट कोर का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया।
गणतंत्र दिवस समारोह 2026 के दौरान, सीनियर अंडर ऑफिसर उत्कर्ष शर्मा को विशिष्ट अतिथियों के सम्मान में आयोजित अखिल भारतीय गार्ड ऑफ ऑनर का नेतृत्व करने का सम्मान प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उत्कर्ष ने प्रधानमंत्री रैली की कमान भी संभाली जिसे गणतंत्र दिवस समारोह का सर्वाधिक प्रतिष्ठित और गौरवपूर्ण सम्मान माना जाता है। अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन, अनुकरणीय नेतृत्व और समर्पण के लिए उन्हें महानिदेशक राष्ट्रीय कैडेट कोर द्वारा प्रदत्त प्रशंसा पत्र से भी सम्मानित किया गया।
डीआईटी विश्वविद्यालय, सीनियर अंडर ऑफिसर उत्कर्ष शर्मा के समर्पण, परिश्रम और राष्ट्र के प्रति अटूट सेवा भावना की भूरि-भूरि प्रशंसा करता है। उनकी यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के समग्र विकास, नेतृत्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से रेखांकित करती है।
उत्कर्ष शर्मा की यह प्रेरणादायक उपलब्धि विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक उत्कृष्टता, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए सार्थक योगदान देने की दिशा में भी प्रेरित करती है।
इस अवसर पर डीआईटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. जी. रघुराम कहते हैं कि सीनियर अंडर ऑफिसर उत्कर्ष शर्मा की यह उपलब्धि पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है और वे उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड में 31वीं इंटर सीपीएसयू शतरंज प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ
ऋषिकेश । टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के ऋषिकेश स्थित कॉरपोरेट कार्यालय में 28 जनवरी, 2026 को 31वीं अंतर केंद्रीय विद्युत क्षेत्र के उपक्रमों (आईसीपीएसयू) की शतरंज प्रतियोगिता का उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ। विद्युत क्षेत्र के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड में 28 जनवरी से लेकर 31 जनवरी, 2026 तक आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता का आयोजन पॉवर स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड (पीएससीबी), विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में किया जा रहा है।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, सिपन कुमार गर्ग ने इस अवसर पर अवगत करवाया कि पीएससीबी के तत्वावधान में आयोजित खेल प्रतियोगिताएं विद्युत क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के मध्य शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य एवं अनुशासन, रणनीतिक सोच एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड कर्मचारियों के समग्र विकास तथा विद्युत क्षेत्र के उपक्रमों के मध्य पारस्परिक सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु खेल एवं कल्याणकारी गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन कुमार शरद, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं), टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा पीएससीबी का ध्वज फहराकर किया गया, जिससे प्रतियोगिता का विधिवत शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह के अंतर्गत प्रतिभागी टीमों द्वारा मार्च पास्ट तथा खिलाड़ियों द्वारा शपथ ग्रहण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो एकता, सत्यनिष्ठा एवं खेल भावना के प्रतीक हैं।
कुमार शरद ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक एवं सौहार्दपूर्ण मंच प्रदान करेगी। उन्होंने खेल एवं व्यावसायिक जीवन में अनुशासन, टीम भावना तथा खेल भावना के महत्व पर भी प्रकाश डाला। विद्युत क्षेत्र के विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों से आए खिलाड़ियों का स्वागत डॉ. ए. एन. त्रिपाठी, मुख्य महाप्रबंधक (मा.सं. एवं प्रशा. तथा कें. सं.), टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह को सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा और अधिक रोमांचक एवं आकर्षक बनाया गया।
इस प्रतियोगिता में पुरुष एवं महिला वर्ग की कुल 11 संस्थाओं की टीमें भाग ले रही हैं, जिनमें विद्युत मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), बीबीएमबी, डीवीसी, ग्रिड इंडिया, एनएचपीसी, पीएफसी, पावरग्रिड, आरईसी, एसजेवीएनएल तथा टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड शामिल हैं। प्रतियोगिता का संचालन तीन विशेषज्ञ निर्णायकों/प्रशिक्षकों की देखरेख में किया जा रहा है, ताकि निष्पक्ष खेल एवं नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके।
एडिफाई वर्ल्ड स्कूल, देहरादून ने देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गणतंत्र दिवस
देहरादून : एडिफाई वर्ल्ड स्कूल, देहरादून ने भारत का 77वां गणतंत्र दिवस बड़े गर्व और उत्साह के साथ मनाया, जो एकता, लोकतंत्र और देशभक्ति की भावना को दर्शाता है।
समारोह का आरंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ, जहां प्रधानाचार्या हरलीन कौर चौधरी ने तिरंगा फहराया। इसके साथ ही छात्रों और स्टाफ द्वारा गाए गए राष्ट्रगान के स्वरों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
समारोह के बाद, स्कूल समुदाय ने एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम देखा, जिसमें छात्रों की प्रतिभा का प्रदर्शन किया गया।
प्रस्तुतियों में देशभक्ति गीत, नृत्य और लघु नाटिकाएं शामिल थीं, जिन्होंने एक गणतंत्र के रूप में भारत की यात्रा और संविधान में निहित मूल्यों पर प्रकाश डाला।
प्राथमिक विभाग की विशेष प्रस्तुतियों ने इस अवसर पर मासूमियत और आकर्षण बिखेरा। इसके साथ ही, लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा के महत्व पर विचार-ोत्तेजक भाषण भी दिए गए।
सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानाचार्या हरलीन कौर चौधरी ने गणतंत्र दिवस के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह दिन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की याद दिलाता है और प्रत्येक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को बनाए रखने की उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराता है।
उन्होंने छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनने, विविधता का सम्मान करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का समापन छात्रों और स्टाफ द्वारा ली गई सामूहिक प्रतिज्ञा के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने राष्ट्र की प्रगति के प्रति प्रतिबद्ध रहने और अपने दैनिक जीवन में करुणा, अनुशासन और एकता के मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने हर्षोल्लास से मनाया 77वां गणतंत्र दिवस
ऋषिकेश: टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने देशभक्ति की भावना के साथ देश का 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास से मनाया। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर टीएचडीसीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, सिपन कुमार गर्ग ने ऋषिकेश स्थित कंपनी के मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने परियोजना स्थलों और कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया एवं गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित की | साथ ही सतत एवं विश्वसनीय विद्युत उत्पादन के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रति संगठन की सामूहिक प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर टीएचडीसीआईएल परिवार ने संविधान निर्माताओं, स्वतंत्रता सेनानियों और भारत के लोकतंत्र की नींव रखने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिससे राष्ट्रीय गौरव की भावना के विशेष अनुभव की अनुभूति की गई।
जनसमूह को संबोधित करते हुए सिपन कुमार गर्ग ने टीएचडीसीआईएल के कर्मचारियों के सामूहिक समर्पण को स्वीकार करते हुए राष्ट्र के विद्युत क्षेत्र को सुदृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि टीएचडीसीआईएल की वर्षों की यात्रा निरंतर प्रदर्शन, लचीलापन और रणनीतिक विकास को दर्शाती है। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्लेख करते हुए, गर्ग ने बताया कि टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की संस्थापित क्षमता में लगभग 130% की वृद्धि हुई है, जो 1,587 मेगावाट से बढ़कर 3,657 मेगावाट हो गई है, जो कि कंपनी के उत्पादन पोर्टफोलियो के महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि इस वृद्धि के साथ-साथ टीएचडीसीआईएल की वित्तीय स्थिति भी सुदृढ़ हुई है | कंपनी की क्रेडिट रेटिंग “एए” से “एए+” तक अपग्रेड हुई है, जो इसके सुदृढ़ परिचालन प्रदर्शन और वित्तीय अनुशासन की पुष्टि करती है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी प्रगति, बढ़ती अपेक्षाएं और सीमित समयसीमा यह मांग करती हैं कि संगठन न केवल उत्तरदायी हों अपितु सक्रियता के साथ भविष्य के लिए तैयार भी रहें।
ऋषिकेश स्थित कॉर्पोरेट मुख्यालय में आयोजित समारोह में एल. पी. जोशी, मुख्य तकनीकी अधिकारी, कुमार शरद, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं), डॉ. ए. एन. त्रिपाठी, मुख्य महाप्रबंधक (मा.सं. एवं-प्रशा. व कें.सं.), एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में अधिकारी/ कर्मचारी एवं परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की सभी परियोजनाओं और कार्यालयों में गणतंत्र दिवस का उत्सव विशेष हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्तिपूर्ण प्रस्तुतियां और कर्मचारियों की भागीदारी शामिल थी, जो संगठन की एकता, गौरव और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की भावना को दर्शाती है।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड देश भर में विभिन्न प्रकार की विद्युत परियोजनाओं का प्रचालन करती है, जिनमें टिहरी एचपीपी (1000 मेगावाट), कोटेश्वर एचईपी (400 मेगावाट), टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट (750 मेगावाट), खुर्जा सुपर थर्मल पावर प्लांट (1320 मेगावाट), पाटन विंड पॉवर प्लांट (50 मेगावाट), द्वारका विंड पॉवर प्लांट (63 मेगावाट), ढुकवां एसएचईपी (24 मेगावाट) और कासरगोड सोलर पॉवर प्लांट (50 मेगावाट) के साथ अन्य रणनीतिक परिसंपत्तियां भी शामिल हैं, जो वर्तमान में 3,657 मेगावाट की संस्थापित क्षमता में योगदान करती हैं।
TECNO Spark Go3 दमदार मजबूती और बेहतरीन सिग्नल के साथ मात्र रू 8,999 में खरीदें
नई दिल्ली : भारतीयों के रोज़मर्रा के उपयोग को ध्यान में रखते हुए बनाया गया स्मार्टफोन TECNO Spark Go3 अब देशभर में मात्र रू. 8,999 की कीमत पर बाज़ार में आ गया है। यह स्मार्टफोन मजबूती, स्मार्ट फीचर्स और बेहतरीन कनेक्टिविटी के साथ लोन्च किया गया है, ताकि यूज़र्स की रोज़ की ज़रूरतों को पूरी कर सके।
‘देश जैसा दमदार’- इस सोच पर आधारित TECNO Spark Go3 उन लोगों के लिए है जो स्टाइलिश के साथ भरोसेमंद भी हो और गिरने, गीला होने या कोई दाग लगने जैसी समस्याओं से सुरक्षित हो।
Spark Go3 में IP64 डस्ट और स्प्लैश रेसिस्टेंस के साथ ड्रॉप-रेडी मजबूती दी गई है, जिससे रोज़मर्रा के झटकों और हादसों की चिंता कम हो जाती है। इसके साथ मिलता है 120Hz सुपर स्मूथ डिस्प्ले, जो स्क्रॉलिंग, ऐप बदलने और स्वाइपिंग को पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ और स्मूद बनाता है।
फोन में मौजूद Ella AI वॉइस असिस्टेंट यूज़र्स को उनकी अपनी भाषा में समझता है—जैसे हिंदी, तमिल, बंगाली, गुजराती और मराठी। रोज़ के काम हों या छोटे कमांड, बातचीत सहज और आसान रहती है। जहां नेटवर्क कमजोर हो वहां भी No Network Communication 2.0 टेक्नोलोजी से गोदामों, बेसमेंट, फैक्ट्रियों, निर्माण स्थलों और ग्रामीण इलाकों जैसे लो या नो-नेटवर्क एरिया में भी कनेक्ट रहने में मदद करती है।
TECNO Spark Go3 का 4GB RAM + 64GB स्टोरेज वेरिएंट ₹8,999 में देशभर के प्रमुख रिटेल स्टोर्स और Amazon पर उपलब्ध है। यह स्मार्टफोन चार रंगों में मिलेगा—Titanium Grey, Ink Black, Galaxy Blue और Aurora Purple।
Spark Go3 सिर्फ अच्छा दिखता ही नहीं है, यह बना है दमदार, भरोसेमंद और भारतीयों की रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए।











