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Sunday, June 14, 2026

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जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, नियम विरूद्ध संचालित गैस गोदाम किया सील

लीज समाप्त होने के बाद कैसे चल रहा गैस गोदाम, कहां थे विभाग के अधिकारी और नियमः डीएम
तीन दिन में अभिलेख प्रस्तुत न किये जाने पर निरस्त होगा लाईसेंस

देहरादून। जिला प्रशासन की टीम ने शुक्रवार तड़के ही रायपुर क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित गैस गोदाम पर बड़ी कार्रवाई करते हुए गोदाम को सीज कर दिया। लीज समाप्त होेने के बाद भी वर्षों से संचालित किया जा रहा था गैस गोदाम। जिलाधिकारी सविन बंसल के के मामला संज्ञान में आते ही जांच बिठाई गई थी। उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी को सम्बन्धित विभागों से समन्वय करते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, जिसके परिपेक्ष्य में आज जिला प्रशासन एवं पुलिस की टीम ने इस पर कार्यवाही की। जिला प्रशासन के इस त्वरित एक्शन से जहां एक 95 वर्षीय बुर्जुग महिला फरियादी को न्याय मिला वहीं जिला प्रशासन के प्रति जनमानस का विश्वास बढा है।
जिलाधिकारी सविन बंसल के जनता दर्शन व जनसुनवाई कार्यक्रम में गढीकैंट निवासी 95 वर्षीय महिला ने उनकी भूमि पर अवैध रूप से संचालित गैस गोदाम होने तथा भूमि कब्जे की शिकायत की गई थी। प्रकरण संज्ञान में आते ही डीएम ने अवैध गैस गोदाम का लाईसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए। तथा शिकायती पत्र में उल्लिखित अन्य समस्त बिन्दुओं पर विस्तृत जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश राजस्व विभाग को दिए गए।
डीएम ने अवैध रूप से संचालित हो रहे गैस गोदाम का अविलम्ब लाईसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से पूछा कि इतने लम्बे समय से जिम्मेदार विभागों ने क्यों नही की, विभागीय अधिकारियों के प्रकरण पर संज्ञान न लिए जाने पर हैरानगी जताते हुए कहा कि विभागीय अधिकारी एवं नियम कहां थे क्यों नही लिया गया सख्त एक्शन। अवैधरूप से संचालित गैस गोदाम का लाईसेंस निरस्त करने की तैयारी, अविलम्ब लाईसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए।
महिला ने अपनी शिकायत पत्र के माध्यम से बताया कि रायपुर में उनकी स्थिति को देखते हुए रांझावाला रायपुर में उनकी 12 हजार वर्ग फीट भूमि पर भूमाफिया की नजर है। इस अवैध कब्जा कर गैस एजेंसी का संचालन किया जा रहा है। उनके पति द्वारा वर्ष 1988 में 10 वर्ष की लीज पर गैस गोदाम संचालित करने के लिए दिया गया था, जिसकी लीज समाप्त होने के बाद भी वर्ष 2000 से किराया देना बंद कर दिया तथा अभिलेखों में हेरफेर कर भूमि अपने नाम कर दी प्रकरण को गंभीरता से लेते डीएम ने स्पष्ट जांच के साथ उचित कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। डीएम के निर्देशों के क्रम में पूर्ति विभाग द्वारा स्टेट लेबल कॉर्डिनेटर (एलपीजी), क्षेत्रीय प्रबन्धक भारत पैट्रोलियम एलपीजी लंढौरा रूड़की, विस्पोटक नियंत्रक इन्दिरानगर को कार्रवाई के निर्देश दिए है।
भाजपा उम्मीदवार कमली भट्ट के खिलाफ कोर्ट की शरण लेंगे विकेश नेगी

देहरादून। दून नगर निगम के वार्ड 48 से भाजपा की पार्षद उम्मीदवार कमली भट्ट के निर्वाचन अधिकारी ने क्लीन चिट दे दी है। कमली भट्ट के नामांकन पर आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने आपत्ति जतायी थी कि उन्होंने तथ्यों को छिपाया है। एडवोकेट नेगी ने आपत्ति दर्ज कराई थी कि कमली भट्ट का घर अतिक्रमण की जद में है तो ऐसे में उनका नामांकन रद्द करने योग्य है। निर्वाचन अधिकारी ने कमली भट्ट द्वारा हाउस टैक्स की रसीद दिये जाने पर रिटर्निंग आफिसर ने उनको चुनाव लड़ने के योग्य पाया है। उधर, नामांकन निरस्त न होने पर एडवोकेट नेगी ने कहा कि कमली भट्ट की हाउस टैक्स की रसीद को जायज नहीं माना जा सकता है। नगर निगम की हाउस टैक्स की रसीद में स्पष्ट लिखा होता है कि रसीद का आधार मालिकाना हक नहीं है। उन्होने कहा कि मामले को लेकर अब वह अदालत की शरण लेंगे।
गौरतलब है कि आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने कल इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि कमली भट्ट का निवास स्थान जिस भगत सिंह कालोनी में है, वह जमीन अतिक्रमण की है। ऐसे में निगम की धारा 13 घ के तहत वह चुनाव लड़ने योग्य नहीं है।
इसके अलावा शिकायत में एडवोकेट विकेश नेगी ने कहा कि 2018 में कमली भट्ट ने चुनाव आयोग को जो संपत्ति का विवरण दिया है उसमें साझीदार में 376 वर्ग मीटर की भूमि का उल्लेख छिपा दिया था। यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन था। कमली भट्ट पार्षद रहते हुए एक अन्य सरकारी भूमि भी पद का दुरुपयोग करते हुए 23 मार्च 2023 को बेच दी थी।
एडवोकेट नेगी का आरोप है कि कमली भट्ट ने अपना जो पता दर्शाया हुआ है कि वह नगर निगम की भूमि पर है और नगर निगम की धारा 13 घ का उल्लंघन है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी का सरकारी भूमि पर अतिक्रमण है तो वह निगम का सदस्य नहीं बन सकता है। इसके अलावा विकेश नेगी ने कमली भट्ट के खिलाफ अदालत में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एक वाद भी दायर किया है। इस मामले की सुनवाई चल रही है। इसकी जांच विजिलेंस भी कर रही है। एडवोकेट विकेश नेगी का कहना है कि कमली भट्ट ने पार्षद के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर अदालत की शरण में जाएंगे।
बेनाम ग्लेशियर का बढ़ रहा लगातार आकार, वैज्ञानिकों की बढ़ रही चिंता

देहरादून। उत्तराखंड से ग्लेशियर को लेकर एक रोचक जानकारी सामने आ रही है। देश दुनिया में ग्लोबल वॉर्मिंग एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसके चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। लेकिन तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर्स के बीच कुछ ऐसे भी ग्लेशियर हैं, जिनका दायरा लगातार बढ़ रहा है। दरअसल, वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के धौली गंगा बेसिन में मौजूद एक बेनाम ग्लेशियर अपने एरिया को एक्सपेंड कर रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद लगभग सभी ग्लेशियर तो पिघल रहे हैं, लेकिन एक ग्लेशियर का आकार मात्र एक महीने में करीब 863 मीटर बढ़ गया था। साथ ही उसका एरिया साल दर साल बढ़ता जा रहा है। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वास्तविकता और वजह।
उत्तराखंड के हिमालय में हजारों की संख्या में ग्लेशियर मौजूद हैं। लेकिन देश दुनिया के लिए एक गंभीर समस्या बनती जा रही ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं। जहां एक ओर ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ग्लेशियर पिघल रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर देहरादून स्थित वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने एक खुशखबरी दी है।
वाडिया के वैज्ञानिकों ने बेनाम ग्लेशियर का अध्ययन किया है जो अपने क्षेत्र को बढ़ा रहा है। चमोली जिले के धौली गंगा बेसिन में दो ग्लेशियर के बीच मौजूद एक बेनाम ग्लेशियर पर वाडिया के वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है। इस ग्लेशियर का आकार करीब 48 वर्ग किलोमीटर है। ये ग्लेशियर नीति घाटी (वैली) में मौजूद रांडोल्फ और रेकाना ग्लेशियर के समीप है। समुद्र तल से इस ग्लेशियर की ऊंचाई करीब 6,550 मीटर है।
दरअसल, हाल ही में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी के ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉ। मनीष मेहता की टीम का एक रिसर्च पेपर बहु-कालिक उपग्रह डेटा का उपयोग करके मध्य हिमालय में ग्लेशियर की वृद्धि की अभिव्यक्तियाँश् पब्लिश हुआ है। इसमें इस बेनाम ग्लेशियर का एरिया सर्ज की बात कही गई है। इस रिसर्च पेपर के अनुसार, ये अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है कि न सिर्फ ग्लेशियर से संबंधित ज्ञान को बढ़ाया जा सके, बल्कि सर्ज प्रकार के ग्लेशियरों के स्थानों और उनके व्यवहार के बारे में जाना जा सके, ताकि इन ग्लेशियरों से आने वाली आपदाओं के खतरनाक प्रभावों से बचा जा सके।

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